शशिकला ने दिनाकरन और वेंकटेश को AIADMK में किया शामिल

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चेन्‍नई : तमिलनाडु में जारी राजनीतिक संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट से चार साल की सजा मिलने के बाद शशिकला नटराजन बुधवार को बेंगलुरु जाकर अदालत में सरेंडर कर सकती हैं। लेकिन इससे पहले, डा. वेंकटेश और दिनाकरन को एआईएडीएमके में शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार, अन्नाद्रमुक प्रमुख शशिकला ने अपने संबंधियों दिनाकरन और वेंकटेश को फिर से पार्टी में शामिल कर लिया है। बता दें कि दोनों (दिनाकरन और वेंकटेश) को जयललिता ने वर्षों पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया था। शशिकला ने कहा कि राज्यसभा के पूर्व सदस्य टीटीवी दिनाकरन को अन्नाद्रमुक का उप महासचिव नियुक्त किया गया है। दोनों शशिकला के करीबी बताए जाते हैं।

उच्चतम न्यायालय का फैसला पार्टी महासचिव वीके शशिकला के खिलाफ आने के कुछ ही देर बाद इदापड्डी के पलानीस्वामी को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नया नेता निर्वाचित किया गया। इसके बाद अन्नाद्रमुक विधायक दल के नवनिर्वाचित नेता पलानीस्वामी ने राज्यपाल सी विद्यासागर राव से मंगलवार को मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

बता दें कि आय से अधिक संपत्ति केस में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शशिकला को दोषी ठहराया और उन्‍हें तत्काल बेंगलुरु की अदालत के समक्ष समर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायालय के इस निर्णय के साथ ही शशिकला की तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पर पानी फिर गया। इस घटनाक्रम से राज्य के सत्तारूढ़ दल में सत्ता को लेकर एक नई जंग छिड़ गयी। उच्चतम न्यायालय ने 19 साल पुराने और जे जयललिता की सहभागिता वाले इस मामले में दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी रह चुकी 60 वर्षीय शशिकला को तुरंत आत्मसमर्पण करने और अपनी चार वर्ष की सजा की शेष अवधि काटने को कहा है। उन्होंने बेंगलुरु जेल में पहले ही छह माह की सजा की अवधि काटी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला को दोषी करार देते हुए निचली अदालत के चार साल की सजा और 10 करोड़ जुर्माने को बरकरार रखा। मामले में शशिकला के अलावा उनके दो रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण को भी दोषी पाया गया। शीर्ष अदालत ने शशिकला को अन्नाद्रमुक की दिवंगत सुप्रीमो जे जयललिता के साथ साजिश करने का दोषी ठहराया है और इस वजह से जन प्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत एक दशक तक चुनावी राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकेंगीं।

बता दें कि शीर्ष अदालत के इस निर्णय के बाद 60 वर्षीय शशिकला को अब आत्मसमर्पण करके चार साल की सजा की अवधि में से करीब साढ़े तीन साल जेल में बिताने होंगे क्योंकि करीब छह महीने वह पहले ही जेल में बिता चुकी हैं। शीर्ष अदालत ने शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों वीएन सुधाकरण और एलावरसी को तत्काल बेंगलुरु की अदालत के समक्ष समर्पण करने का निर्देश दिया जो तीनों मुजरिमों द्वारा सजा की शेष अवधि जेल में बिताने के लिये तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी और इस फैसले पर अमल करने के लिये आगे कदम उठाएगी। सुधाकरण स्व जयललिता का दत्तक पुत्र है जबकि इलावरसी शशिकला के बडे भाई की विधवा है।

शशिकला 1996 में इस मामले में जेल जा चुकी हैं। इसके बाद विशेष अदालत द्वारा उन्हें चार साल की कैद और दस करोड रूपए के जुर्माने की सजा सुनाये जाने के बाद भी वह जेल गयी थीं। इस मामले में जयललिता को भी चार साल की कैद और एक सौ करोड रूपए के जुर्माने की सजा सुनायी गयी थी। शीर्ष अदालत ने जयललिता के खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी क्योंकि उनका पिछले साल पांच दिसंबर को निधन हो गया था। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में आपराधिक साजिश उनके चेन्नई में पोएस गार्डन स्थित निवास में रची गयी थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि जयललिता का निधन हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी गयी है परंतु अन्य अभियुक्तों को दोषी ठहराया जाता है और उन्हें शेष अवधि की कैद की सजा भुगतनी होगी।

करीब तीन दशक तक जयललिता की छाया के रूप में रहने वाली शशिकला का इस समय तमिलनाडु के कार्यवाही मुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवन के साथ जबर्दस्त सत्ता संघर्ष छिड़ा हुआ था। शशिकला ने मंगलवार को पनीरसेलवम को अन्नाद्रमुक की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था।

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